जब जेंटलमैन ऑफ़ क्रिकेट सचिन तेंदुलकर स्लेजेड – क्रिकेट के जेंटलमैन सचिन तेंदुलकर ने कब की छींटाकशी, जानें क्यों और क्यों बनाया था निशाना

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सचिन तेंदुलकर ने खुद इस बात की जानकारी दी कि एक बार वह भी स्लेज कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2000 में नैरोबी में खेले गए एक मैच के दौरान ऐसा हुआ था।

नई दिल्ली: क्रिकेट के भगवान नाम से प्रसिद्ध सचिन तेंदुलकर (सचिन तेंदुलकर) को न सिर्फ विश्व का सर्वकालिक महानतम हस्तियों में शुमार किया जाता है, बल्कि इस जेंटलमैन क्रिकेट का उन्हें एम्बेस्डर भी माना जाता है। सचिन बेहद जेंटल क्रिकेटर माने जाते हैं। वह आमतौर पर किसी भी छींटाकशी से दूर ही रहते हैं। हाल ही में सकलैन मुश्ताक (सकलेन मुस्ताक) ने भी इसकी गवाही दी थी। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सचिन को स्लेज किया तो उन्होंने कहा कि वह एक खिलाड़ी के तौर पर उनका सम्मान करते हैं और उन्होंने कभी आपके साथ कोई स्लेजिंग नहीं की तो आखिर क्यों आप कर रहे हैं। सचिन के इस जवाब के बाद सकलैन ने इतने शर्मिंदा हुए थे कि उन्होंने फिर कभी सचिन को स्लेज नहीं किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सचिनंदुलकर भी स्लेज कर चुके हैं। इसकी जानकारी सचिनंदुलकर ने खुद दी।

मैकोग्राम को बनाया गया था

सचिन ने बताया कि एक बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच में उन्होंने तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा पर फब्चर कसी थी। सचिन ने बताया कि 2000 आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी का क्वॉर्टरफाइनल मैच केन्या के नैरोबी में खेला जा रहा था। इस मैच में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था। सचिन ने कहा कि वह उस दिन को कभी भूल नहीं सकते हैं। उन्होंने मैकग्रा का लय बिगाड़ने के लिए उन्हें भड़काया था। वह विकेट काफी नम था और बल्लेबाजी करना आसान नहीं था। मैकग्रा ने जैसा पहला ओवर डाला, उसके बाद उन्होंने सौरव गांगुली से बात की और कहा कि वह मैकग्रा के पीछे जाते हैं। उन्हें समझ में आ गया था कि कुछ अलग करना होगा और माइंड गेम खेलना होगा। इसके बाद सचिन ने मैकग्रा से एक-दो बातें कहीं। सचिन के मुंह से स्लेजिंग सुनकर मैकग्रा भी दंग रह गए थे। सचिन ने कहा कि इसके बाद उन्होंने मैकग्रा के खिलाफ खुलकर और आवेदन करना शुरू कर दिया। इनमें कुछ रिस्की रिस्की और भी थे।

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सचिन ने बताया, यह स्ट्रेटजी था

सचिन ने बताया कि वह चाहते थे कि मैकग्रा आउटसाइड द ऑफ स्टंप की जगह उनके शरीर पर गेंद डालें। उनकी यह योजना थी कि वह मैकग्रा को गुस्सा दिलाएं और वह उनके शरीर पर गेंदबाजी करें, न कि उन्हें आउट करने पर ध्यान दें। सचिन ने कहा कि हम कुछ मौकों पर चूके, लेकिन मैकग्रा से वह बना, जो बनाना चाहते थे। सचिन ने बताया कि उस मैच में उन्होंने 38 रन बनाए थे। इस मैच में हम जीते थे। इस कारण से वह खुश थे।

भारत ने ऑस्ट्रेलिया को दी 20 रन से मात

सचिन की यह रणनीति प्रभावी रही और भारत ने यह मैच ऑस्ट्रेलिया से 20 रनों से जीत लिया। इस मैच में टीम इंडिया पहले बल्लेबाजी कर रही थी। ऑस्ट्रेलिया को पहले 10 ओवर में कोई भी विकेट नहीं मिला था। भारत ने बिना विकेट खोए 11.3 ओवर में 66 रन बनाए थे। सचिन 37 गेंद पर 38 रन बनाकर ब्रेट ली की गेंद पर आउट हुए। उस पारी में तेंदुलकर ने तीन चौके और तीन छक्के लगाए थे। भारत ने युवराज सिंह के 80 गेंद पर 84 रन की मदद से 9 विकेट पर 265 का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया। मैकग्रा इस मैच में कोई विकेट हासिल नहीं कर पाए। उन्होंने 9 ओवर में 61 रन खर्च कर दिए थे। स्लो ओवर रेट्रो के चलते ऑस्ट्रेलिया के खाने से दो ओवर कम कर दिए गए थे और उन्हें 48 ओवर में जीत के लिए 266 रन बनाने का खेल मिला था। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम 46.2 ओवर में 245 रन पर आलआउट हो गई थी। इस मैच में भारत की ओर से जहीर खान, अजीत अगरकर और वेंकटेश प्रसाद ने दो-दो विकेट लिए थे।

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मैकग्रा के साथ एक और अलड़ंत को याद किया

इसी दौरान सचिन तेंदुलकर ने मैकग्रा के साथ एक और अलड़ंत को याद किया। 2001 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का पहला एकदिवसीय मैच चल रहा था। यह वही दौरा था, जिसमें कोलकाता टेस्ट में लक्ष्मण और द्रविड़ की करिश्माई बल्लेबाजी के दम पर फॉलोआन के बाद भारत जीता था और ऑस्ट्रेलिया के लगातार 16 टेस्ट जीत के क्रम को रोक दिया गया था। सचिन ने कहा कि हम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत के तुरत बाद वनडे के लिए उतरे थे। वह और वीवीएस लक्ष्मण अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। टीम को तेज शुरुआत मिली थी। इस मैच में उन्होंने फैसला किया था कि वह मैकग्रा को निशाना बनाएंगे। इसके बाद उन्होंने मैकग्रा के एक ओवर में तीन चौका और एक सिक्स लगाया था। सचिन ने बताया कि योजना यह थी कि मैकग्रा को लय में न आने दिया जाए। इस मैच में वह 35 रन पर रनआउट हो गए थे, लेकिन मैं उस मैच में अच्छी लय में थे और रन आउट नहीं होते तो शायद लंबी पारी खेल जाती।
















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