स्किज़ोफ्रेनिया का इलाज: स्किज़ोफ्रेनिया: सड़क पर नहीं दिखते हैं, रोगी रोगी, मौन इलाज का कमाल है – सिज़ोफ्रेनिया का आधुनिक इलाज और मानसिक रोग हिंदी में

0
67


एनबीटी

सीजोफ्रेनिया एक क्रॉनिक डिजीज है। लेकिन इस बीमारी के मरीज खुद को बीमार नहीं मानते हैं। इस कारण दवाई खाने से और डॉक्टर के पास जाने से बचता है। इस स्थिति में रोगी की स्थिति और अधिक गंभीर होती है। मरीज एक सामान्य जीवन जी संभव इसके लिए उसके परिवार को अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता होती है … यहां मैक्स अस्पताल पटपड़गंज (दिल्ली) के सीनियर सैकिट्रिस्ट डॉ। राजेश कुमार बता रहे हैं कि बीते दशकों में सीजोफ्रेनिया के इलाज में किस तरह का बदलाव आया है …

बीमारी में ही छिपा है इसका ट्रीटमेंट बैरियर है

-सीजोफ्रेनिया शक्ति की बीमारी है तो रोगी अपने परिवार पर भी शक करता है। मरीज को लगता है कि मेरा परिवार ही मुझे मारना चाहता है। इसलिए डॉ के पास लेजाकर मुझे पॉइजन दिलाना चाहते हैं या दवाइयों के जरिए मारना चाहते हैं। ऐसी स्थिति सीजोफ्रेनिया के ज्यादातर रोगियों में देखने को मिलती है।

इलाज से जुड़ी मुश्किलें

-साइकॉलजिस्ट और साकाइट्रिस्ट की कमी के कारण समय रहते रोगी को उचित चिकित्सा नहीं मिल पाती है। इस कारण रोग अपनी गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है, जिसके बाद में दवाओं के साथ भी स्वास्थ्य करना मुश्किल होता है।

सिज़ोफ्रेनिया: लॉस्ट वर्ल्ड में जीत सीजोफ्रेनिया से ग्रसित लोग हैं

-सीजोफ्रेनिया के इलाज में एक दूसरी समस्या यह है कि लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर जागरूकता बहुत कम है। इस जानकारी को बढ़ाने के लिए ही हर साल विश्व स्वास्थ्य ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से ‘मेंटल हेल्थ अवेयरनेस वीक’ मनाया जाता है और हर साल 24 मई को ‘वर्ल्ड सीजोफ्रेनिया डे’ के रूप में मनाया जाता है।

एनबीटी

सीजोफ्रेनिया का इलाज आसान हुआ

ट्रीटमेंट का मॉर्डन तरीका

-आज के जब में इलाज पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गया है। मॉर्डन मेडिसिन लेने के बाद उस तरह की समस्या नहीं देखने को नहीं मिलती है, जिस तरह की दिक्कत पुराने वक्त में सामने आ गई थी।

-मॉडर्न टाइम में सीजोफ्रेनिया के मरीज को अगर सही समय पर ट्रीटमेंट दिलाया जाए तो वह सामान्य जीवन जी सकता है।)

कोरोना तनाव: जिसे योग और मेडिटेशन बोरिंग लगता है, तनाव मुक्त रहने के ये 12 तरीके खास हैं

-पहले इस बीमारी के इलाज के दौरान मरीजों को नींद बहुत आती थी। इलाज भी आसानी से उपलब्ध नहीं था। लेकिन अब इलाज भी उपलब्ध है और दवाईयां खाने के बाद मरीज को बहुत नींद भी नहीं आती है। इससे व्यक्ति की प्रोडक्ट सभी बना रहता है।

-जो रोगी इस बीमारी के प्रारंभिक स्तर पर होते हैं, उन्हें यदि समय से दवाई और ट्रीटमेंट दिलाया जाए तो वे सामान्य व्यक्ति की तरह अपना करियर और सोशल लाइफ इंजॉय कर सकते हैं।

एनबीटी

अब दवाओं का साइड इफेक्ट नहीं होता है

खत्म हो गया है दवाओं का साइड इफेक्ट

-अस्सी या नब्वे के दशक में जिन दवाओं से सीजोफ्रेनिया के मरीजों का इलाज किया जाता था, उन दवाओं का साइड इफेक्ट काफी गंभीर रूप में देखने को मिलता था। इनमें, शरीर का कोई अंग टेढ़ा हो जाना, हर समय कंपकपी आना, हर समय मुंह से लार टपकते रहना या दौरे पड़ जाना शामिल थे।

स्वस्थ मस्तिष्क: लिंग की गति से दौड़ेगा मस्तिष्क, डॉ। ने शीघ्रया ब्रेन को हेल्दी रखने का तरीका बताया

-लेकिन मॉडर्न ट्रीटमेंट में इस तरह के साइड इफेक्ट ना के बराबर होते हैं। यदि सही तरीके से ट्रीटमेंट लिया जाए तो कोई दूसरा व्यक्ति यह जज नहीं कर पाएगा कि सामनेवाला इंसान सीजोफ्रेनिया जैसी बीमारी से जूझ रहा है।

-क्योंकि सीजोफ्रेनिया के मरीजों को परिवार, दवाई और डॉ पर शक रहता है। इसलिए मॉडर्न ट्रीटमेंट में इस तरह की एमबीएस भी हैं, जिन्हें पानी और खाने में घोलकर दिया जा सकता है। अगर इसमें भी दिक्कत हो तो मरीज को इंजेक्शन दिया जा सकता है, जिसका असर लगभग एक महीने तक रहता है।

भावनात्मक लोग: इन 7 चीजों से परेशान लोगों में बहुत ही भावनात्मक हैं



Source link