लॉकडाउन में घर बैठे-बैठे कैसे और कितने मोटे हो रहे हैं लोग? | जानिए कैसे लोगों का वजन बढ़ रहा है और कोविद 19 लॉकडाउन के दौरान कितना rest-of-world – समाचार हिंदी में

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कोरोनावायरस (कोरोना वायरस) संक्रमण के कारण वहां लॉकडाउन के कारण खाने पीने की सहुलियतें सीमित हो गई हैं। लोग घरों में रहने पर मजबूर हैं और बाहर नहीं जा पा रहे हैं इसलिए कहीं मोटापा (मोटापा) बढ़ रहा है तो कहीं इसका खतरा है। एक तरफ, पहले ही मोटापे के शिकार मरीज़ परेशान हैं तो दूसरी तरफ, रिटेल सेक्टर (रिटेल) से पैकेज फूड (पैकेज्ड फूड) की ज्यादा बिक्री की खबरें हैं। कुल मिलाकर एक चिंता भी उपज रही है और इस स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर मज़ाकिया चर्चाएँ भी जारी हैं। जानिए कि कोविद 19 के दौर में लोगों के वज़न (वजन हासिल) पर कितना असर पड़ रहा है।

ताला खोलो तो लोग पहचान नहीं पाएंगे?

हालांकि यह अतिशयोक्ति है, जो सोशल मीडिया पर मीम्स बन रहे हैं में प्रकट की जा रही है। वेट गेन और क्वारैण्टीन 15 जैसे हैशटैग लॉकडाउन के दौरान समय पर ट्रेंड करते हैं। मीम्स में लोग फोटो डालकर बता रहे हैं कि लॉकडाउन से पहले वह कैसे थे और मोटापे की अपनी एक काल्पनिक तस्वीर डालकर अंदाज़ा दिखा रहे हैं कि लॉकडाउन के बाद उनकी हालत कैसी रही।

क्यों बढ़ रहा है मोटापे का खतरा?लॉकडाउन के चलते लोगों का सोने जागने का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ गया है। विकल्प कम होने के कारण अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन का सेवन किया जा रहा है और देर रात तक जागने के कारण सुबह का व्यायाम नहीं किए जाने के भी मामले विशेषज्ञ नोटिस कर रहे हैं। कोविड 19 के संक्रमण से बचाव के चक्कर में लोग लाइफस्टाइल बीमारियों जैसे डायबिटीज़, दिल के रोग, हाइपर कैंसर और बीपी की समस्याओं से घिर सकते हैं।

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लोगों के सोने जागने और व्यायाम का शेड्यूल भी बिगड़ा हुआ है। फाइल फोटो।

डेटा का एक उदाहरण

केरल को देश में मोटापे की राजधानी माना जाता रहा है। विकासखंड स्टडीज़ केंद्र के मुताबिक यहाँ के आंकड़े देखें। 15 से 60+ उम्र के पुरुषों में 52.5% बीपी की समस्या है, जबकि 56.3% महिलाएं हैं। इसी तरह, 15 से ज़्यादा की उम्र के 41.6% पुरुष और 38.8% महिलाएं डायबिटीज़ की शिकार हैं। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि लॉकडाउन के बाद ये प्रतिशत और बढ़े दिख सकते हैं और समस्याएं भी और बढ़ी नज़र आ सकती हैं।

तो विशेषज्ञ क्या कदम उठा रहे हैं?

डायटिशियन, फिज़िशयन और फिटनेश विशेषज्ञ इंटरनेट और टीवी के ज़रिये अपने मरीज़ों या सामान्य रूप से लोगों के साथ कनेक्ट होकर उन्हें बेहतर डाइट के लिए टिप्स दे रहे हैं। वहीं मिलिंद सोमन जैसे सेलिब्रिटी फिट को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। कई विशेषज्ञ योग और व्यायाम संबंधी मशवरे दे रहे हैं ताकि आप लॉकडाउन के समय में अपने वज़न को नियंत्रित रख सकें।

कैसे बढ़ रहा है वज़न?

लॉकडाउन के समय में एक तो परिवर्तन और आशंकाओं के चलते लोगों ने घरों में राशन और मोज्जड फूड का स्टॉक किया है। दूसरा, वर्क फ्रॉम होम के कारण कई लोगों के घरों में बेकाबू तरीके से कुछ न कुछ हर समय खा या पी रहे हैं, इनमें से अनाज खाने की अधिकता है। तीसरी, चिंता और डर के कारण शरीर में जो हॉर्मोन संबंधी प्रक्रियाओं हैं, वो भी मोटापे या डायबिटीज़ और बीपी जैसे रोगों का कारण बनती हैं। और, वर्क फ्रॉम होम व इंटरनेट या टीवी देखने में ज्यादा समय रुकने के कारण सोने जागने का अनुशासन बिगड़ा है।

सबूत क्या हैं? लॉकडाउन के दौरान रिटेल सेक्टर का जायज़ा लेती मिंत की रिपोर्ट साफ बताती है कि स्नैक्स, प्रोसेड फ़ूड, सोयाज्ड मीट और फ्रोज़न मिठाई की बिक्री में खासी बढ़ोत्तरी देखी जाती है। दूसरी तरफ, लॉकडाउन से कई तरह के व्यापारों को घाटा हुआ है, जबकि खाद्य उद्योग को फायदा हो रहा है। रिपोर्ट है कि नेस्ले इंडिया ने अपने लाभ में 13.5% का उछाल प्रकट किया है। नेस्ले इंडिया के मैगी नूडल्स और कॉफी जैसे उत्पादों की बिक्री खासी बढ़ी है।

क्या यह सिर्फ भारत का हाल है?

नहीं। पश्चिमी देशों में भी मोटापे को लेकर बड़ी चिंताएं सामने आई हैं। वेबएमडी पत्रिका ने एक हज़ार अमेरिकी लेखों के बीच में एक सर्वे किया तो पता चला कि कोविद 19 संबंधित प्रतिबंधों के कारण लगभग आधी महिलाओं और एक चौथाई पुरुषों ने वज़न बढ़ने की बात मानी। वहीं, अमेरिका से बाहर किए गए सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा पुरुष और एक तीन महिलाओं ने वेट बढ़ने की बात कही। दूसरी तरफ, एक महीने के भीतर 5 लाख से ज्यादा फेसबुक यूज़र्स ने क्वारैँटीन वेट गेन और क्वारैँटीन 15 जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया।

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विदेशों में वेट गेन का कारण?

मार्च के आखिरी कुछ हफ्तों में फरवरी की तुलना में अमेरिकियों ने 266% ज्यादा गैप किया। इसके अलावा ब्रेडेड 54% औ नूडल्स 36% ज्यादा खाए गए यानी कार्बोनेटेड भोजन के सेवन में इजाफा हुआ। एक और डेटा में बताया गया कि अमेरिकियों ने 40% ज्यादा खाने की बात कही। दूसरी ओर, 70% अमेरिकियों और 35% अमेरिका से बाहर के लोगों ने कहा कि वे ‘तनाव की वजह से ज्यादा खा’ रहे हैं और वज़न बढ़ रहा है।

कुछ कमी भी वज़न है

ऐसा नहीं है कि लॉकडाउन में हर जगह से वज़न बढ़ने के एकमात्र समाचार हैं। जो लोग इस समय का इस्तेमाल अपनी फिटनेस और इम्यूनिटी बढ़ाने पर कर रहे हैं, वो वज़न घटाने में कामयाब भी रहे हैं। भारत और अन्य कम आय वाले देशों में एक तरफ यह स्थिति भी है कि लोगों के पास खाने तक के लाले पड़े हैं तो दूसरी तरफ, विकसित देशों में डाइट को लेकर जागरूकता की भी खबरें हैं।

लाइफस्टाइल बीमारियों को लेकर चिंता है

इन परिस्थितियों में विशेषज्ञों की बड़ी चिंता यह है कि जो लोग पहले केवल मोटापे या उससे जुड़ी बीमारियों के गंभीर शिकार थे, लॉकडाउन के कारण उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हुई है। दूसरी ओर, लॉकडाउन के चलते बेतहाशा खाने पीने और शारीरिक मेहनत कम होने जैसी वजहों से लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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